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क्या अब इंटरनेट डेटा पर भी लगेगा टैक्स ?

सरकार के अंदर शुरू हुआ मंथन, प्रस्ताव पर चर्चा तेज : जानें क्या है पूरा मामला और आम यूज़र्स पर पड़ सकता है क्या असर 📶📱

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आने वाले समय में मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करना लोगों के लिए महंगा पड़ सकता है। दरअसल, सरकार इंटरनेट डेटा पर हर GB के हिसाब से अलग टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक हालिया समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। फिलहाल मोबाइल रिचार्ज पर उपभोक्ताओं को 18% जीएसटी देना पड़ता है। ऐसे में अगर इंटरनेट डेटा पर अलग से टैक्स लागू किया जाता है तो यह आम यूज़र्स के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित हो सकता है। 📶

Government Plan Data Usage Tax: आने वाले समय में इंटरनेट चलाना लोगों के लिए महंगा हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार हर GB डेटा के इस्तेमाल पर अलग से टैक्स लगाने की संभावना पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो मोबाइल डेटा का उपयोग करते समय यूजर्स की जेब पर सीधा असर पड़ सकता है। फिलहाल यह प्रस्ताव विचार के स्तर पर है और सरकार इसके सभी पहलुओं पर मंथन कर रही है।

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक हालिया समीक्षा बैठक में ‘डेटा यूसेज टैक्स’ के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। जैसे ही यह खबर सामने आई, टेक इंडस्ट्री और डिजिटल सेक्टर में हलचल तेज हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू हुआ तो मोबाइल रिचार्ज प्लान पहले से ज्यादा महंगे हो सकते हैं और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ेगा।

स्क्रीन टाइम घटाने और पॉजिटिव इस्तेमाल पर जोर :

सरकार का मानना है कि इंटरनेट का उपयोग अधिकतर सकारात्मक और उत्पादक कामों के लिए होना चाहिए। इसी सोच के तहत इस प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है। दूरसंचार विभाग (DoT) को सितंबर 2026 तक इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर यह बताने को कहा गया है कि डेटा उपयोग पर टैक्स लगाना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से संभव है या नहीं।

सरकार का एक उद्देश्य बच्चों और युवाओं में तेजी से बढ़ रहे ‘स्क्रीन टाइम’ को कम करना भी बताया जा रहा है। योजना यह है कि ऐसा मॉडल तैयार किया जाए जिससे इंटरनेट का जिम्मेदार और सकारात्मक उपयोग बढ़े तथा डिजिटल लत पर कुछ हद तक नियंत्रण लगाया जा सके। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि सरकार शिक्षा, काम और मनोरंजन के लिए इस्तेमाल हो रहे डेटा के बीच अंतर कैसे तय करेगी।

क्या ऐसा कर पाना मुमकिन है ?

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के पूर्व प्रधान सलाहकार सत्या एन. गुप्ता ने इस प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि डेटा पर टैक्स लागू करना व्यवहारिक रूप से बेहद मुश्किल है और इससे देश की डिजिटल सेवाओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि ऐसा कदम डिजिटल इनोवेशन की रफ्तार को धीमा कर सकता है और वैश्विक डिजिटल प्रतिस्पर्धा में भारत की बढ़त को नुकसान पहुंचा सकता है।

गौरतलब है कि फिलहाल मोबाइल रिचार्ज प्लान पर पहले से ही 18% GST लगाया जाता है। ऐसे में अगर डेटा पर अलग से टैक्स लगाया गया तो यह यूजर्स के लिए दोहरी आर्थिक मार साबित हो सकता है।

अगर टैक्स लगा तो कितनी होगी कमाई?

रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार स्पेक्ट्रम नीलामी और लाइसेंस फीस के अलावा राजस्व बढ़ाने के नए विकल्प तलाश रही है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में भारत में कुल मोबाइल डेटा खपत लगभग 229 अरब GB रही। ऐसे में यदि सरकार हर GB डेटा पर सिर्फ 1 रुपये का टैक्स भी लागू करती है तो इससे लगभग 22,900 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।

एक तरफ यह तर्क दिया जा रहा है कि यह राशि देश के विकास कार्यों में उपयोगी हो सकती है, वहीं दूसरी तरफ विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा बोझ आम इंटरनेट यूजर्स पर पड़ेगा और डिजिटल सेवाएं महंगी हो सकती हैं। 📶

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