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कम उम्र में बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा, इन 3 उपायों से कर सकते हैं बचाव

बदलती लाइफस्टाइल और खानपान की आदतों के कारण अब कम उम्र में भी कई गंभीर बीमारियां देखने को मिल रही हैं। इन्हीं में किडनी से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार अनियंत्रित शुगर लेवल और हाई ब्लड प्रेशर किडनी की बीमारियों के प्रमुख कारण हैं, जो किडनी की फिल्टर करने वाली छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।

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इसके अलावा पेन किलर दवाइयों का अधिक सेवन, मोटापा, किडनी स्टोन, संक्रमण, जेनेटिक डिसऑर्डर और धूम्रपान जैसी आदतें भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। हालांकि लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करके इन बीमारियों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।

किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह खून को फिल्टर करके शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों, अतिरिक्त पानी और अनुपयोगी तत्वों को यूरिन के जरिए बाहर निकालती है। साथ ही किडनी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स, एसिड-बेस बैलेंस, ब्लड प्रेशर और हड्डियों को मजबूत रखने वाले मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है।

किडनी की बीमारियों के प्रमुख कारण

भारत में किडनी की बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और अब युवा वर्ग भी इससे तेजी से प्रभावित हो रहा है। इसके मुख्य कारण डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं हैं।

इसके अलावा किडनी स्टोन, पेन किलर दवाइयों का ज्यादा इस्तेमाल और कुछ एंटासिड दवाइयां भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

किडनी रोग के शुरुआती लक्षण

किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षणों को समय पर पहचानकर इलाज शुरू किया जा सकता है। इसके प्रमुख संकेत इस प्रकार हैं—

पेशाब में बदलाव – पेशाब में झाग या बुलबुले आना, पेशाब कम होना या रात में बार-बार पेशाब आना।
शरीर में सूजन – सुबह के समय आंखों के आसपास या हाथ-पैरों में सूजन दिखाई देना।
पाचन से जुड़ी समस्याएं – किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर मतली और उल्टी की समस्या हो सकती है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

किडनी रोग से बचने के 3 जरूरी उपाय

1. संतुलित डाइट
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए डाइट में नमक और अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करना चाहिए, ताकि शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहें। किडनी रोग होने की स्थिति में प्रोटीन का सेवन सीमित और फाइबर की मात्रा बढ़ानी चाहिए। पानी का सेवन डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना बेहतर रहता है।

2. नियमित फिजिकल एक्टिविटी
हेल्दी रहने के लिए शारीरिक गतिविधि बेहद जरूरी है। सप्ताह में कम से कम 5 दिन 20–30 मिनट तक एक्सरसाइज या तेज चलना चाहिए। इससे ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल, लिपिड और मोटापा नियंत्रित रहता है।

3. दवाइयों का सावधानी से उपयोग
कुछ पेन किलर और एंटासिड दवाइयां किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं, इसलिए इनका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। ब्लड प्रेशर और शुगर की दवाइयां नियमित लेना भी जरूरी है।

किडनी डैमेज होने पर इलाज के विकल्प

डायलिसिस – इसमें मशीन की मदद से खून से विषैले पदार्थ और अतिरिक्त पानी निकाला जाता है। इसके लिए मरीज को आमतौर पर हफ्ते में 2–3 बार अस्पताल जाना पड़ता है।

किडनी ट्रांसप्लांट – इस प्रक्रिया में एक स्वस्थ किडनी को सर्जरी के जरिए मरीज के शरीर में लगाया जाता है। किडनी परिवार के किसी सदस्य द्वारा दान की जा सकती है या कानूनी प्रक्रिया के बाद ब्रेन-डेड व्यक्ति से प्राप्त की जाती है।

निष्कर्ष

विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित डाइट, नियमित एक्सरसाइज और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी समस्याओं को भी नियंत्रित किया जा सकता है, जो किडनी रोग की मुख्य वजह बनती हैं।

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