उदयपुर। शहरी क्षेत्रों में लागू ‘पहाड़ संरक्षण मॉडल नियमावली-2024’ को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस नियमावली की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान इस मामले को पूर्व से लंबित याचिका के साथ सूचीबद्ध करने के निर्देश भी दिए हैं।याचिका उदयपुर की ‘झील संरक्षण समिति’ द्वारा दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि 18 अप्रैल 2025 को अधिसूचित यह नियमावली राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 337 के तहत जारी की गई है, जबकि यह धारा पहाड़ संरक्षण के लिए नियम बनाने का अधिकार नहीं देती। ऐसे में यह नियमावली मूल कानून के दायरे से बाहर है।

समिति ने आरोप लगाया कि यह नियमावली संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 48-ए का उल्लंघन करती है। साथ ही, उदयपुर मास्टर डेवलपमेंट प्लान के विपरीत पहाड़ियों पर हो रहे अवैध निर्माण और भू-उपयोग परिवर्तन को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है।
आदेशों की अनदेखी का आरोप
याचिका में यह भी कहा गया कि नई नियमावली हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों—‘अब्दुल रहमान’ (2004), ‘राजेंद्र राजदान’ (2007) और ‘गुलाब कोठारी’ (2017) सहित 2018 की फुल बेंच के निर्देशों का उल्लंघन करती है।
सुप्रीम कोर्ट से मिली नई याचिका की अनुमति
समिति के अनुसार, 2018 के नियमों को चुनौती देने वाली याचिका 23 मई 2025 को निस्तारित हो गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी 17 नवंबर 2025 को वापस लेते हुए नई याचिका दायर करने की छूट दी गई, जिसके आधार पर वर्तमान याचिका दाखिल की गई है।




